संतो की शिक्षा =Santo ki siksha kyu ? Bhag-1


संतो की शिक्षा =Santo ki siksha kyu ?

हेलो दोस्तो नमस्कार मैं अभिषेक कुमार आप लोगों के बीच एक नए उमंग के साथ-

आज कुछ नया सीख लेते हैं-


एक गांव का व्यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया| और वह वहां पहुंचने के बाद यह देखता है कि संत जी मायूस अवस्था में एकांत में बैठे थे संत जी स्मरण कर रहे थे उस आदमी ने सतनाम वाहेगुरू बोला श्री नानक जी भी उत्तर दिए भोजन करवाया ज्ञान विचार सुनाए वह व्यक्ति चला गया एक दिन फिर वही व्यक्ति आया और बोला महाराज जी आप कभी खुश नहीं दिखाई देते क्या कारण है संत नानक जी ने कहा की

संत नानक जी ने कहा कि हे भाई इस मृत्युलोक मैं सब ना समान है पता नहीं किसकी जाने की बारी कब आ जाए इसलिए जिनके सिर पर मौत गरज रही हो उस व्यक्ति को नाचना गाना हंसी मजाक कैसे अच्छा लगेगा मूर्ख या नशे वाला व्यक्ति इस गंदे लोक में खुशी मनाता है जैसे एक व्यक्ति की पत्नी को विवाह के 10 वर्ष पश्चात पुत्र हुआ उसके उत्पन्न होने की खुशी में लड्डू बनाएं बैंड बाजे बजाए उधमस उतार दिया अगले वर्ष जन्मदिन को ही मृत्यु हो गई कहा तो जन्मदिन की खुशी की तैयारी कहां रोमा पीटी शुरू हो गई घर नरक बन गया अब मना लो खुशी
संतो की शिक्षा =Santo ki siksha kyu ? Bhag-1

अब मना लो खुशी यह सच्चाई सुनकर कांप गया और बोला कि हे प्रभु आपकी बातें सत्य हैं परंतु कि आप कभी खुशी नहीं मनाते नानक जी ने उत्तर दिया कि खुशी मनाता हूं
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